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गौला नदी के टूटे हुए तटबंध तथा सुरक्षा दीवार की मांग को लेकर ग्रामीणों ने सरकार के खिलाफ खोला मोर्चा”लगाएं गम्भीर आरोप। 

लालकुआं

रिपोर्टर मजहिर खान

“सोने की खान”कहें जाने वाली सबसे बड़ी गौला नदी सरकार को हर साल खनन के रूप में करोड़ों का राजस्व तो देती है लेकिन मानसून सत्र में अपने विकराल रूप से बिन्दुखत्ता के क्षेत्र के कई गांवो पर अपना कहर बरपाते हुए किसानों की सैकड़ों एकड़ कृषि भूमि को भी अपने आगोश में ले जाती हैं जिससे हर साल किसानों की कई एकड़ जमीन नदी में जमींदोज हो जाती हैं। नदी का रुख ग्रामीण इलाकों में ना पहुंचे इसको लेकर सरकार हर साल नदी किनारे करोड़ों रुपये के तटबंध बनाती है लेकिन गुणवत्ता खराब होने के चलते नदी के बहाव में करोड़ों के तटबंध बह जाते हैं और ग्रामीणों की जमीन नदी की जद में आकर समा जाती हैं।

बताते चले कि बरसात शुरू हो चुकी है लेकिन अभी तक नदी के टूटे हुए तटबंध को ठीक नहीं किया गया है जिससे कि एक बार फिर ग्रामीणों को डर सता रहा है कि कहीं गोला नदी के विकराल रूप में एक बार फिर उनकी कृषि भूमि नदी में न समा जाए।जिसको लेकर ग्रामीणों में भारी आक्रोश है।

इधर ग्रामीणों का कहना है कि तटबंध नहीं बनने और गुणवत्ता की शिकायत को लेकर कई बार जिला प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधि से गुहार लगा चुके हैं लेकिन क्षतिग्रस्त हो चुके तटबंधों का निर्माण अभी तक नहीं हो पाया हैं।

उन्होंने कहा कि सरकारी सिस्टम की लापरवाही कहें या अधिकारियों की उदासीनता बरसात से पहले गौला नदी में पानी के बहाव से किसानों की जमीन और मकानों को बचाने के लिए बाढ़ सुरक्षा दीवार और तटबंध बनाए जाने थे लेकिन मानसून सीजन शुरू हो गया है अभी तक तटबंध के नाम पर एक पत्थर भी नदी में नहीं लगा हैं ऐसे में गौला नदी अपना विकराल रूप धारण करती हैं तो कई ग्रामीण क्षेत्रों में भारी तबाही मनाएंगी। जिससे लोगों को भारी नुकसान होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि गौला नदी ठेकेदारो के लिए कमाई का जरिया बन चुकी हैं। उन्होंने कहा हर साल करोड़ के तटबंध बनाए जाते हैं जो एक बरसात भी नही झेल पाते हैं और पानी के बाहों में क्षतिग्रस्त हो टूट जाते है। उन्होंने कहा कि पूर्व में बनाये गये करोड़ों के तटबंध सब पानी में बहे गये।उन्होंने कहा कि तटबंध निर्माण में भ्रष्टाचार और कमिश्नखोरी का खेल खेला जाता है। जिसका खमियाजा ग्रामीणों को झेलना पड़ता है। पूर्व में भी कई लोगों की भूमि और घर नदी में समा चुकें है लेकिन अभी तक इसका कोई स्थायी समाधान सरकार और प्रशासन द्वारा नही किया गया है। लोगों का आरोप है कि बाढ़ सुरक्षा के लिए बने तटबंध और चैकडैम हल्की सी बरसात भी नहीं झेल पा रहे हैं, जिससे गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। उन्होंने सरकार से जल्द से जल्द सुरक्षा दीवार और क्षतिग्रस्त तटबंधों के निर्माण की मांग की है।

 

 

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