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जन अधिकार पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने रुड़की हरिद्वार विकास प्राधिकरण (HRDA) के कार्यों पर सवाल उठाए हैं।

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एचआरडीए में नियुक्ति पर उठे सवाल: जन अधिकार पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष आज़ाद अली ने वीसी और एक्शन पर लगाए गंभीर आरोप, कार्रवाई न होने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी दी।

जन अधिकार पार्टी* के राष्ट्रीय अध्यक्ष *आज़ाद अली* ने रुड़की हरिद्वार विकास प्राधिकरण (HRDA) के कार्यों पर सवाल उठाए हैं।

उन्होंने वीसी सोनिका मीणा और अधिशासी अभियंता *राजन सिंह* पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

आरोप है कि HRDA में नियुक्तियों और कार्य विभाजन में नियमों को दरकिनार कर मनमानी की जा रही है, जिससे भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिल रहा है।

आज़ाद अली ने कहा कि राजन सिंह मूल रूप से उत्तर प्रदेश आरएनएन विभाग के अधिकारी थे, जिनकी पहले वरिष्ठ पद पर तैनाती थी, लेकिन कुंभ मेले के दौरान उन्हें एक्शन पद पर लाया गया।

उनका दावा है कि राजन सिंह HRDA में कथित रूप से अधिकारियों के लिए “दलाली” का काम कर रहे हैं, जो नियमों के विरुद्ध है।

राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि राजन सिंह के खिलाफ एसआईटी और ईडी सहित तीन जांचें चल रही हैं। इसके बावजूद उन्हें महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी जा रही हैं, जो पूरे सिस्टम पर प्रश्नचिन्ह खड़ा करता है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि एचआरडीए वीसी सोनिका मीणा का संरक्षण राजन सिंह को प्राप्त है, जिससे भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिल रहा है।

आज़ाद अली ने कांग्रेस पार्टी पर भी निशाना साधते हुए कहा कि भाजपा सरकार की कथित तानाशाही और बढ़ते भ्रष्टाचार के खिलाफ कांग्रेस प्रभावी विपक्ष की भूमिका निभाने में असफल रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को यह भय है कि यदि वे भाजपा के खिलाफ खुलकर आवाज उठाएंगे तो उनकी अपनी फाइलें खुल सकती हैं।

इसलिए विपक्ष जनता की उम्मीदों पर खरा नहीं उतर पा रहा है। उन्होंने बताया कि इस पूरे मामले को लेकर उन्होंने ज्वाइंट मजिस्ट्रेट को ज्ञापन सौंपा है और मांग की है कि राजन सिंह को तत्काल उनके मूल विभाग में वापस भेजा जाए। साथ ही जिन-जिन अधिकारियों पर भ्रष्टाचार के आरोप हैं, उनकी फाइलें खोलकर निष्पक्ष जांच कराई जाए।

आज़ाद अली ने चेतावनी दी है कि यदि एक सप्ताह के भीतर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो जन अधिकार पार्टी एचआरडीए कार्यालय और वीसी सोनिका मीणा के खिलाफ उग्र प्रदर्शन करेगी। उन्होंने कहा कि यदि ऐसे अधिकारियों को कुंभ जैसे संवेदनशील आयोजन में बनाए रखा गया तो करोड़ों रुपये के घोटालों की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने दोहराया कि नियमों का उल्लंघन कर अधिकारियों को महत्वपूर्ण पदों पर बनाए रखना प्रशासनिक पारदर्शिता पर सवाल उठाता है। जन अधिकार पार्टी ने स्पष्ट किया है कि वह इस मुद्दे को लेकर सड़क से लेकर न्यायालय तक संघर्ष करेगी और भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी लड़ाई जारी रखेगी।

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