भिवानी हरियाणा
कांग्रेस व्यापार सैल के प्रदेश अध्यक्ष अशोक बुवानीवाला ने कहा कि जनस्वास्थ्य एवं अभियांत्रिकी विभाग में नशा करके आने वाले अधिकारियों पर सरकार शिकंजा कसे। ऐसे अधिकारी आखिर जनता को कैसी सुविधाएं देंगेे, यह इनकी हरकतों से ही साफ हो जाता है। ऐसे अधिकारियों की सुबह-शाम एल्कोहल जांच होनी चाहिए। इस तरह के मामले में सरकार ने सिरसा और फरीदाबाद के दो अधिकारियों की जांच के आदेश भी दिए हुए हैं।
उन्होंने कहा कि किसी भी नौकरी में नशा करके दफ्तर आने की छूट नहीं दी जा सकती। सरकारी नौकरी में तो और अधिक सख्ती होनी चाहिए। जनता को सुविधाएं देने के लिए बिठाए गए अधिकारी नशा करके अगर दफ्तर आएंगें तो वे जनता को क्या सुविधाएं दे पाएंगें। ऐसी हरकतें करने वालों पर सरकार और विभाग के अधिकारियों द्वारा सख्ती दिखानी चाहिए। जिस तरह से सिरसा और फरीदाबाद में दो एक्सईएन की सुुबह-शाम एल्कोहल जांचने के अधिकारिक आदेश दिए गए, वैसे ही भिवानी में भी होनी चाहिए। ये दोनों एक्सईएन भी सवालों के घेरे में हैं। डिवीजन नंबर-दो में लगे एक्सईएन फूल सिंह पर स्टेट विजिलेंस की ओर से दादरी में गबन का केस दर्ज है। उसके खिलाफ भी चार्जशीट दायर की जा चुकी है। वहीं, डिवीजन-एक में उसे लगाया गया है, जो डिवीजन एक में था। उसके खिलाफ भी भ्रष्टाचार की शिकायत की गई थी। तभी उसका तबादला हुआ।

भ्रष्टाचार के एक मामले में अशोक बुवानीवाला ने कहा कि टेंडर घोटाले के आरोपी को पंचकूला मुख्यालय भेजे जाने के बाद फिर से भिवानी आना भ्रष्टाचार को बढ़ावा देगा। उन्होंने कहा कि जनस्वास्थ्य एवं अभियांत्रिकी विभाग में भिवानी के गांव सांजरवास में एसई रहे दलबीर सिंह पर दो महीने पहले टेंडर में घोटाले का आरोप लगा था। उनके खिलाफ शिकायत होने पर उनका तबादला पंचकूला मुख्यालय कर दिया गया।

उनकी जगह पर सुनील रंगा को सरकार ने एसई लगाया। टेंडर में घोटाले के मामले में आरोपी एसई के खिलाफ विभाग की ओर से चार्जशीट भी दाखिल की गई है। इसके बावजूद आरोपी एसई भिवानी आने के लिए जुगड़ भिड़ा रहा है। उन्होंने कहा कि गांव सांजरवास में 2 करोड़ 60 लाख रुपये की लागत से जलापूर्ति योजना का विस्तार किया जाना है। इसके लिए विभाग ने टेंडर जारी किए थे। जिसमें सतनाली निवासी ठेकेदार दीपक पचार ने भी टेंडर लगाया था। अधीक्षक अभियंता (एसई) ने सिर्फ अपने ही हस्ताक्षर करके दीपक के टेंडर की तकनीकी बोली को रद्द कर दिया। मुख्य अभियंता की ओर से गठित कमेटी ने जांच में पाया कि अधीक्षक अभियंता द्वारा बोलियों को रद्द करना न्यायसंगत नहीं है। अधीक्षक अभियंता द्वारा की गई यह कार्यवाही सीधे तौर पर भ्रष्टाचार की ओर इशारा करती है।




