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बिंदुखत्ता के विकास पर छिड़ी सियासी जंग, दुर्गापाल बोले श्रेय की राजनीति बंद करे भाजपा। 

लालकुआँ

रिपोर्टर -मजहिर खान

लालकुआँ विधानसभा क्षेत्र के सबसे गांव बिंदुखत्ता के विकास को लेकर सियासी पारा चढ़ गया है। लालकुआं के ‘विकास पुरुष’ कहे जाने वाले कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री हरीश चंद्र दुर्गापाल ने भाजपा पर तंज कसते हुए कहा कि “काम किसी और के, लेकिन फीता काटने की होड़ किसी और को लगी है।”

उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा नेता आज जिन विकास कार्यों का श्रेय ले रहे हैं, उनकी नींव कांग्रेस शासनकाल में रखी गई थी। उन्होंने कहा कि सड़क, बिजली, स्कूल, अस्पताल, आईटीआई और अन्य संस्थागत सुविधाएं वर्षों की योजनाबद्ध मेहनत का परिणाम हैं, न कि हालिया घोषणाओं का।

उन्होंने याद दिलाया कि स्वर्गीय मुख्यमंत्री पंडित नारायण दत्त तिवारी के कार्यकाल में बिंदुखत्ता को विशेष प्राथमिकता देते हुए विकास की मजबूत आधारशिला रखी गई थी।

राजस्व गांव या चुनावी ‘रिवाइज्ड वादा।

उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि बिंदुखत्ता को राजस्व गांव बनाने का मुद्दा हर चुनाव से पहले “री-लॉन्च” कर दिया जाता है।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2012 में कांग्रेस सरकार ने इस संबंध में कैबिनेट प्रस्ताव पास किया था, लेकिन उसी समय नगर पालिका गठन का विरोध कर पूरी प्रक्रिया को रोक दिया गया।

“पहले विकास रोको, फिर उसी मुद्दे पर आंदोलन करो — यही नई राजनीति है,” उन्होंने तंज कसा।

‘40 साल में कुछ नहीं हुआ’ पर पलटवार

भाजपा के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि जिन सड़कों पर आज नेता दौरे कर रहे हैं, जिन स्कूलों में बच्चे पढ़ रहे हैं और जिन अस्पतालों में इलाज हो रहा है, उन्हें नकारना राजनीतिक स्मृतिभ्रंश जैसा है।

उन्होंने कहा कि इतिहास मिटाने से हकीकत नहीं बदलती भाजपा को खुली चुनौती। उन्होंने कहा कि यदि भाजपा सरकार वास्तव में गंभीर है तो बिंदुखत्ता को राजस्व गांव बनाकर दिखाए।“काम होगा तो हम तालियां भी बजाएंगे और धन्यवाद भी देंगे, लेकिन घोषणा से विकास नहीं होता।उन्होंने कहा कि पुरानी फाइलें, नए दावे

पूर्व मंत्री ने बताया कि वर्ष 2002 में विधायक रहते हुए प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा गया था, लेकिन सर्वोच्च न्यायालय की शर्तों के कारण मामला आगे नहीं बढ़ सका। बाद में भी प्रयास हुए, मगर सरकार बदलने से प्रक्रिया अधूरी रह गई।

अंत में उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा—बिंदुखत्ता को भाषण नहीं, समाधान चाहिए” जनता अब शिलान्यास नहीं, परिणाम देखना चाहती है।

 

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