
लालकुआँ
बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम घोषित करने की मांग को लेकर तहसील में वन अधिकार संगठन का अनिश्चितकालीन धरना आज 14वें दिन भी जारी रहा। इस अवसर पर सभी ग्राम सभाओं के संयोजकों की बैठक आयोजित की गई। बैठक में सरकार और इंडिया गठबंधन द्वारा वनाधिकार कानून के तहत पूर्व स्वीकृत दावे के आधार पर अधिसूचना जारी कराने के बजाय वन भूमि अनारक्षण की प्रक्रिया अपनाने की मांग को मूल आंदोलन को कमजोर करने का षड्यंत्र बताया।
ग्राम सभा के सदस्यों ने कहा कि दो अलग-अलग स्थानों पर आंदोलन चलने से जनता में भ्रम की स्थिति पैदा हो रही है, जिससे वनाधिकार कानून के तहत राजस्व ग्राम की अधिसूचना जारी करने की मूल मांग कमजोर हो रही है।

संगठन के सचिव एडवोकेट बलवंत बिष्ट ने कहा कि 8 नवंबर 2013 को जनजातीय कार्य मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा राजस्व ग्राम बनाने की प्रक्रिया को वन संरक्षण अधिनियम 1980 के बजाय अब वनाधिकार अधिनियम, 2006 के तहत अपनाने की बात स्पष्ट की गई है। इसके बावजूद वन भूमि अनारक्षण की मांग करना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि 13 नवंबर 2000 को सुप्रीम कोर्ट की रोक के बाद से इस प्रक्रिया के माध्यम से एक भी गांव को राजस्व नहीं बनाया जा सका। हॉल ही में नैनीताल हाईकोर्ट द्वारा दिनांक 20.03.2026 को दिए निर्णय से भी इसकी पुष्टि की जा सकती है।
बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि वन अधिकार संगठन द्वारा आगामी बुधवार को आयोजित की जा रही खुली चर्चा में भाजपा और इंडिया गठबंधन के नेता स्पष्ट करें कि वन भूमि अनारक्षण की प्रक्रिया अपनाने से बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम का दर्जा कैसे संभव है। संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर ग्राम सभाओं ने संबंधित राजनीतिक दलों का खुला विरोध करने की बात कही।
बैठक में वन अधिकार संगठन के अध्यक्ष उमेश भट्ट, सचिव एडवोकेट बलवंत बिष्ट, नंदन बोरा, दौलत सिंह कोरंगा, रमेश गिरी गोस्वामी, कैप्टन खिलाफ सिंह दानू, कैप्टन इंद्र सिंह पनेरी, भुवन चंद्र शर्मा, दीपक कर्नाटक, दीपक नेगी, दीपक जोशी, राजेंद्र बिष्ट पप्पी, नवीन जोशी सहित सभी ग्रामसभाओं के संयोजक उपस्थित रहे।




