सीजीएसटी आयुक्तालय में चौथी हिंदी पुस्तक प्रदर्शनी एवं पुरस्कार समारोह आयोजित।

गाजियाबाद –
केंद्रीय माल एवं सेवा कर सीजीएसटी आयुक्तालय में मंगलवार को चौथी हिंदी पुस्तक प्रदर्शनी एवं हिंदी पखवाड़ा पुरस्कार वितरण समारोह का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता आयुक्तालय के आयुक्त विपुल गुप्ता ने की। इस अवसर पर अपर आयुक्त श्रवण कुमार बंसल, संयुक्त आयुक्त अभिषेक कुमार सहित विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी तथा शहर के अनेक हिंदी प्रेमी उपस्थित रहे।
प्रतिष्ठित प्रकाशकों ने लिया हिस्सा
समारोह के दौरान आयोजित पुस्तक प्रदर्शनी में देश के प्रमुख प्रकाशन संस्थानों—राष्ट्रीय पुस्तक न्यास (एनबीटी), राजकमल प्रकाशन, वाणी प्रकाशन, गीता प्रेस, सर्वभाषा ट्रस्ट, मूनलिपि क्रियेशन तथा बुक्स एंड बियोंड—ने हिस्सा लिया। प्रदर्शनी में विभिन्न विधाओं की ज्ञानवर्धक एवं साहित्यिक पुस्तकों का प्रदर्शन किया गया, जिसे आगंतुकों ने काफी सराहा।

*सांस्कृतिक प्रस्तुतियों व काव्यपाठ ने मोहा मन*
कार्यक्रम का शुभारंभ विभागीय पदाधिकारियों द्वारा प्रस्तुत काव्यपाठ से हुआ, जिसने समारोह को साहित्यिक रंग प्रदान किया। इसके उपरांत ‘नींव शक्ति संस्था’ के सौजन्य से ‘देव भागीरथी लर्निंग सेंटर’ के दिव्यांग विद्यार्थियों ने हिंदी भाषा पर आधारित भावपूर्ण प्रस्तुति दी ।विद्यार्थियों की इस प्रस्तुति ने उपस्थित जनसमूह को भावविभोर कर दिया। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले इन विद्यार्थियों को सम्मानित कर उनका उत्साहवर्धन भी किया गया।
समारोह में रागिनी धृति एवं अंजू जैन ने काव्यपाठ के माध्यम से श्रोताओं को साहित्यिक अभिव्यक्ति और काव्य-संवेदना से परिचित कराया। वहीं, कनिष्ठ अनुवादक अधिकारी निधि कुमार झा, मुस्तफ़ा हुसैन और डॉ. आशिक़ कुमार द्वारा प्रस्तुत ‘किस्सागोई’ ने कार्यक्रम में समां बांध दिया।
राजभाषा के अधिकाधिक प्रयोग पर बल
अपने अध्यक्षीय संबोधन में आयुक्त विपुल गुप्ता ने राजभाषा हिंदी के प्रभावी कार्यान्वयन तथा कार्यालयीन कामकाज में इसके अधिकाधिक प्रयोग के महत्व पर विशेष प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि राजभाषा के प्रचार-प्रसार के लिए आयोजित ऐसी गतिविधियां अधिकारियों एवं कर्मचारियों में हिंदी के प्रति रुचि विकसित करने और उनकी रचनात्मक अभिव्यक्ति को प्रोत्साहित करने का सबसे प्रभावी माध्यम हैं।
यह आयोजन विभाग में राजभाषा हिंदी के प्रति जागरूकता बढ़ाने, साहित्यिक गतिविधियों को गति देने और प्रशासनिक कार्यों में हिंदी के प्रयोग को और अधिक व्यापक बनाने की दिशा में एक सार्थक पहल के रूप में संपन्न हुआ।




