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आदिग्राम परियोजना से जनजातीय क्षेत्रों में डिजिटल सशक्तीकरण को नई दिशा, 17 हजार से अधिक परिवारों को मिला तकनीक और योजनाओं का लाभ !!

पंतनगर (ऊधम सिंह नगर), 04 अक्टूबर 26

आज गोविन्द बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के डॉ० रतन सिंह सभागार में ‘आदिग्राम: लाभार्थी संवाद एवं सम्मान समारोह’ का आयोजन किया गया। समारोह की अध्यक्षता पतंजलि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ० आचार्य बालकृष्ण ने की। मुख्य अतिथि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो० (डॉ०) शिवेंद्र कुमार कश्यप रहे। इस अवसर पर स्वयं सहायता समूह की 300 लाभार्थी महिलाओं के साथ-साथ 42 ग्राम प्रधानों एवं पतंजलि की 20 से अधिक योग शिक्षिकाओं को सम्मानित कर उनकी सराहनीय भूमिका को रेखांकित किया गया।

विदित हो कि जनजातीय कार्य मंत्रालय (भारत सरकार) एवं जनजाति कल्याण निदेशालय (उत्तराखंड) के सहयोग से दिव्य योग मंदिर न्यास द्वारा संचालित ‘Techno-enabled AdiGram’ परियोजना के अंतर्गत उत्तराखंड के 64 जनजाति बहुल ग्रामों का चयन किया गया था, जिनमें ऊधम सिंह नगर के 42 ग्राम भी सम्मिलित थे। परियोजना का उद्देश्य डिजिटल तकनीक, डेटा और सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से समावेशी विकास सुनिश्चित करना था।

परियोजना के अंतर्गत 17,000 से अधिक परिवारों और लगभग 65,000 जनजातीय नागरिकों का डिजिटल एवं जियो-टैग्ड डेटाबेस तैयार किया गया। सभी परिवारों और प्रमुख ग्राम परिसंपत्तियों की 100 प्रतिशत जियो-टैगिंग पूर्ण हुई। 5,000 से अधिक किसानों को डिजिटल कृषि प्लेटफॉर्म से जोड़ा गया तथा 15,000 से अधिक व्यक्तियों को आजीविका व कौशल विकास प्रशिक्षण दिया गया। 200 से अधिक जनजातीय शिल्पकारों को इरुला ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से जोड़ा गया और 50 प्रतिशत से अधिक परिवारों को पात्र सरकारी योजनाओं से जोड़ा गया। डिजिटल साक्षरता में 30-40 प्रतिशत सुधार तथा लाभार्थियों की आय में 20-30 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई। सभी 64 गांवों के लिए साक्ष्य-आधारित विकास योजनाएं भी तैयार की गईं।

परियोजना के तहत स्वयं सहायता समूहों को डिजिटल मार्केटिंग के साथ अन्नदाता, इरुला और सेवा सर्विस ऐप का प्रशिक्षण दिया गया। अन्नदाता ऐप किसानों को सीधे बाजार से जोड़ता है, इरुला ऐप स्थानीय शिल्पकारों के लिए मार्केटप्लेस उपलब्ध कराता है तथा सेवा सर्विस ऐप सेवा प्रबंधन को सरल बनाता है। टेक्नो-सक्षम आदिग्राम परियोजना ने डेटा, डिजिटल तकनीक और सामुदायिक भागीदारी पर आधारित एक व्यावहारिक मॉडल प्रस्तुत किया है, जो अन्य जनजातीय क्षेत्रों के लिए भी अनुकरणीय हो सकता है।

समारोह को संबोधित करते हुए आचार्य बालकृष्ण ने संस्थान की कृषि संबंधी पहलों की समीक्षा की और नई संभावनाओं पर प्रकाश डाला। पतंजलि अनुसंधान संस्थान, हरिद्वार द्वारा विकसित ‘धरती का डॉक्टर’ मृदा परीक्षण यंत्र तथा संस्थान की पुस्तकों का प्रदर्शन किसानों, शोधकर्ताओं और विशेषज्ञों के बीच आकर्षण का केंद्र बना रहा।

समारोह में पतंजलि के वैज्ञानिक एवं साध्वी बहनें भी उपस्थित रही।

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