
लालकुआं
माह-ए-रमजान की मुकद्दस और रूहानी फिजाओं के बीच नगर की जामा मस्जिद में तरावीह की नमाज के दौरान कुरान शरीफ मुकम्मल होने पर जश्न-ए-कुरान का भव्य और पुरनूर कार्यक्रम अकीदत व एहतराम के साथ आयोजित किया गया। इस मौके पर मस्जिद परिसर में बड़ी संख्या में नमाजी, अकीदतमंद और अहल-ए-मोहल्ला मौजूद रहे, जिससे पूरा माहौल रूहानियत से सराबोर नजर आया।
18 फरवरी को रमजान का चांद नजर आने के साथ ही जामा मस्जिद में तरावीह की नमाज का सिलसिला शुरू हुआ था। पूरे रमजान शरीफ के दौरान बड़ी तादाद में नमाजियों ने तरावीह में शिरकत कर इबादत का सवाब हासिल किया। कुरान शरीफ मुकम्मल होने पर मस्जिद का माहौल बेहद पुरनूर और जज्बाती हो गया।

तरावीह की नमाज इमाम हसीन रजा ने पढ़ाई। कुरान शरीफ मुकम्मल होने के बाद नमाजियों ने इमाम हसीन रजा का फूल-मालाओं से इस्तकबाल कर उन्हें दिली मुबारकबाद दी। इस दौरान नमाजियों ने अल्लाह तबारक व तआला की बारगाह में हाथ उठाकर मुल्क व दुनिया में अमन-ओ-चैन, तरक्की और खुशहाली की दुआ मांगी, साथ ही समाज में मोहब्बत, भाईचारा और आपसी इत्तेहाद कायम रहने की भी दुआ की गई।
कार्यक्रम के दौरान उलेमा-ए-कराम ने अपनी तकरीरों में कुरान की तालीमात और इस्लाम के पैगाम को बयान करते हुए लोगों से हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की सीरत पर चलने की नसीहत की। उन्होंने कहा कि रमजान का पाक महीना सब्र, रहमत, इबादत और जरूरतमंदों की मदद का पैगाम देता है।
इस मौके पर मस्जिद में खिदमत अंजाम दे रहे नायब इमाम हाफिज फईम रजा, हाफिज उज्जैन रजा, एतिकाफ में बैठे हाफिज गुफरान रजा, हाफिज रायन रजा और कब्रिस्तान की देखरेख करने वाले साजिद भाई सहित मस्जिद की युवा कमेटी व अन्य खादिमों को सम्मानित कर उनका हौसला अफजाई किया गया। सदर शफी अहमद ने कार्यक्रम में पहुंचने पर सभी लोगों का शुक्रिया अदा किया। कार्यक्रम का संचालन फिरोज खान ने किया तथा कमेटी के एक वर्ष के आय-व्यय का विवरण भी प्रस्तुत किया गया।
कार्यक्रम के अंत में तमाम अकीदतमंदों के बीच तबर्रुख और मिष्ठान वितरित किया गया। इसके बाद नमाजियों ने एक-दूसरे से गले मिलकर तरावीह मुकम्मल होने की मुबारकबाद दी और पुरनूर माहौल में कार्यक्रम का समापन हुआ। इस मौके पर गुलाम नबी गामा, शफी अहमद, बिल्लू भाई, नफीस खान, फिरोज खान, शाने आलम, बिस्मिल खान, शमशाद खान, मुख्तयार अहमद, हाजी रहीश, अंसार आलम, माजिद अली सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।




