
हरिद्वार
हर माँ बाप की एक ही ईच्छा मेरे बच्चों को मिले अच्छी शिक्षा सबके अपने अपने सपने जिन पर भारी होती डिजिटल की आभासी तकनीक पाइन क्रैष्ट पब्लिक स्कूल के परिसर में आयोजित एक आध्यात्मिक सत्संग में उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए शिक्षाविद डॉ. विजयेंद्र पालीवाल ने कहा कि आज परिवारों में समाज में जो इतनी विकृति आती जा रहीं है उसका सबसे बड़ा कारण आज बढ़ती मोबाईल की लत है…इस लत से बच्चों को कैसे दूर रखा जाए ये एक गंभीर समस्या है जो इसे रोक सकते थे वो आज सबसे ज्यादा इसकी लत का शिकार स्वयम अभिभावक ही बनते जा रहे हैं…महिलाएं हर रोज नई नई रील बनाने में व्यस्त हैं…किसी को किसी की परवाह नहीं इसका सबसे ज्यादा दुष्प्रभाव स्कुल जाते बच्चे पर हो रहा हैं…उनमें धैर्य की कमी…गुस्सा…खीज दिन-ब-दिन बढ़ाता जा रहा है…न पढ़ाई में मन न किसी और काम में मन लगता…आज सड़क पर होने वाले अधिकतर एक्सीडेंट भी इसका एक कारण है…मोबाईल की लत ये है कि स्कूटी बाइक पर चलते कान में गरदन टेढ़ी कर मोबाइल लगा कर ड्राइविंग करते हैं…कार में भी चलते चलते ये ही हाल है।

ट्रेफिक जाम.. में भी मोबाईल चालू…..समय रहते इस पर लगाम न लगी तो स्थिति कितनी विकृत हो जाएगी शायद कल्पना से बाहर है….आज कोई किसी की बात..किसी का आदर सब भूल गए….यहां तक कि एक छत के नीचे रहते पति पत्नि सीमित बातेँ करने लगे….इसकी लत के कारण जिसका सीधे सीधे खामियाजा बच्चे भुगत रहे हैं…..हमें समय रहते सजग होना पड़ेगा…बच्चे नाजुक होते जा रहे हैं…उन्हें डांटना तक सहन नहीं…ये ही कारण है बच्चों में गलत कदम उठाने का…संयुक्त परिवार टूटते जा रहे एकल परिवार उसमें भी उनमे बातचीत की जगह मोबाईल…परिणाम सामने है..डॉ. पालीवाल ने कहा कि संयुक्त परिवार थे दादा दादी चाचा ताऊ सब एक-दूसरे के बच्चों को सुरक्षा प्रदान करते थे…बच्चों का उस परिवेश में आराम से लालन पालन हो जाता था वे कब बड़े हो गए पढ़ लिख गए माता पिता को एहसास तक नहीं होता था…आज माँ बाप दोनों काम काजी घर से बाहर आयें तो मोबाइल…तथाकथित घर में सन्नाटा पसरा रहता है रात के 12 कब बज गए पता ही नहीं चलता




