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हरियाणा में नौकरियां में सिस्टम कैसे काम करता रहा, अंदर खाते कैसे सिस्टम पर कब्जा कर नौकरियों में होती रही धांधली !!

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हरियाणा में सिस्टम कैसे काम करता है और कैसे सिस्टम पर कब्जा होता है इसका एक उदाहरण देखिए। आलोक वर्मा नाम का एक इंसान हरियाणा पब्लिक सर्विस कमीशन में चेयरमैन बन जाता है और छह साल तक हरियाणा के युवाओं के हक मार मारकर भारी पैमाने पर भतिर्यों में बाहरी लोग भरता रहा और खास बात ये है कि हरियाणा के बीसी और एसएसी कैटेगरी के युवाओं के हक पर इसका सबसे ज्यादा असर पडा लेकिन चूंकि जात पात में बंटे हरियाणा के लोग बिना पर्ची खर्ची ग्रुप सी की नौकरी लेकर खुश होते रहे और आलोक वर्मा चुपचाप बाहर से अपने आदमी लाकर हरियाणा में अफसर भर्ती करता रहा। हरियाणा के रीढ वाले युवाओं ने इसकी आवाज भी उठाई लेकिन रातों रात सरकार ने उनका धरना कुचल दिया और स्पोर्ट नहीं मिलने की वजह से वो रोते पीटते घर बैठे गए।

आलोक वर्मा के 6 साल के कार्यकाल में हरियाणा पब्लिक सर्विस कमीशन हरियाणा पोस्ट सेल काउंटर के रूप में कुख्यात रहा, अनेक पेपर लीक का रिकॉर्ड बना। आलोक वर्मा के कार्यकाल में उस समय इतिहास रचा गया जब HPSC का डिप्टी सक्रेटरी करोड़ों रुपए नकद के साथ अपने कार्यालय में पकड़ा गया। जिस आलोक वर्मा को आज जेल में होना चाहिए था वह आलोक वर्मा प्रदेश की हजारों युवा प्रतिभाओं का भविष्य चौपट धडल्ले से करता रहा।

आलोक वर्मा के कार्यकाल में अटैची कांड में बड़े -बड़े लोगों के नाम आए लेकिन, अकेले डिप्टी सक्रेटरी को बलि का बकरा बनाकर पूरे मामले को बड़ी सफाई के साथ लीप दिया गया और आलोक वर्मा की मंडी बदस्तूर जारी रही।

आलोक वर्मा ने हमारे हजारों बच्चों का भविष्य बर्बाद कर दिया और बाहरी भर दिए लेकिन ना सरकार ने बच्चों की सुनी और ना विपक्ष ने धरातल पर कुछ किया। OBC ब्रिगेड वाले रोते रह गए, ADO भर्ती, डेंटल सर्जन आदि हर भर्ती में आलोक वर्मा की, तानाशाही कहें या गुंडागर्दी, चलती रही लेकिन उसकी सेहत पर कोई फर्क नहीं पड़ा।

अब आलोक वर्मा रिटायर हो गया है लेकिन जाने से पहले उस एचसीएस को एचपीएसएसी का चेयरमैन बनवाने में कामयाब हो गया जिसने आलोक वर्मा के कार्यकाल में उसकी हर बात पर आंख बंद करके अमल किया। अब एक तरह से हरियाणा में मुख्यमंत्री ही नहीं बल्कि हरियाणा पब्लिक सर्विस कमीशन भी डमी की तरह ही काम करेगा और गजब देखिए जो सरकार पिछली सरकारों में नौकरियां बिकने और बिना पर्ची खर्ची का नारा देती है उसको चेयरमैन लगाने के लिए वो आदमी मिला जो हुड्डा सरकार में एचसीएस बना।

बात बात पर फाइलों को मुंह पर मारने वाले आलोक वर्मा के रिटायरमेंट के दिन एचपीएससी के कर्मचारियों तक ने मुक्ति दिवस मनाया था लेकिन नियती और जुगाड देखिए बंदे के, अब भी एचपीएससी चलाएगा रिमोट से।

 

 

 

 

 

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