
हल्द्वानी
रिपोर्ट मजहिर खान
हल्द्वानी में प्रस्तावित ऑफलाइन जनगणना कार्य को लेकर शिक्षकों में नाराज़गी खुलकर सामने आ गई। शनिवार को बड़ी संख्या में शिक्षक जनगणना किट लेने के लिए नगर निगम कार्यालय पहुंचे, लेकिन वहां की स्थिति और प्रशासनिक बयान से असंतुष्ट होकर उन्होंने निगम परिसर में ही धरना शुरू कर दिया।
जानकारी के अनुसार, आज से पूरे देश में ऑफलाइन जनगणना कार्य शुरू होना था। इसके तहत स्थानीय शिक्षकों को भी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। इसी क्रम में सभी शिक्षक आवश्यक किट और निर्देश लेने के लिए नगर निगम पहुंचे थे। लेकिन मौके पर मौजूद अधिकारियों और मैनेजर के रवैये से शिक्षक असहज हो गए।

विवाद की मुख्य वजह नगर आयुक्त के उस कथित बयान को बताया जा रहा है, जिसमें कहा गया था कि शिक्षक स्कूल समय के बाद जनगणना का कार्य करेंगे और इसके लिए उन्हें अलग से मानदेय दिया जाएगा। इस बयान पर शिक्षकों ने कड़ी आपत्ति जताई। उनका कहना है कि वे पहले से ही स्कूलों में पूर्णकालिक जिम्मेदारी निभा रहे हैं, ऐसे में अतिरिक्त समय में जनगणना जैसे बड़े कार्य को करना उनके लिए व्यावहारिक नहीं है।
धरने पर बैठे शिक्षकों ने स्पष्ट कहा कि वे “दोहरा काम” नहीं करेंगे। उनका तर्क है कि शिक्षा व्यवस्था पहले ही कई चुनौतियों से जूझ रही है और ऐसे में शिक्षकों पर अतिरिक्त प्रशासनिक बोझ डालना उचित नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि सरकार को जनगणना कार्य कराना है, तो इसके लिए अलग से स्टाफ की व्यवस्था की जानी चाहिए।
धरने के दौरान शिक्षकों ने प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी भी की और अपनी मांगों को लेकर ज्ञापन देने की बात कही। उनका कहना है कि जब तक इस मुद्दे पर स्पष्ट और संतोषजनक समाधान नहीं निकलेगा, तब तक उनका विरोध जारी रहेगा।
वहीं, प्रशासन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि, सूत्रों के मुताबिक अधिकारियों द्वारा शिक्षकों को समझाने का प्रयास किया जा रहा है ताकि जनगणना कार्य समय पर शुरू हो सके।
इस पूरे घटनाक्रम ने शिक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक समन्वय पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि प्रशासन और शिक्षकों के बीच यह गतिरोध कब तक खत्म होता है और जनगणना कार्य किस तरह आगे बढ़ता है।




