गलत सोच जीवन की समस्या तो ज्ञान है अंतिम समाधान, जानें गीता के अनमोल विचार।
मृत्यु हो ,उत्पत्ति तुम ,गायत्री छंद वसंत तुम | निश्चय तुम्हीं ,पौरुष तुम्ही अरु कृष्ण हो ,मदहंत तुम |
लखनऊ
ये दिव्य स्तुति पंक्तियाँ हैं भगवत गीता के ज्ञान पर आधारित रचना
“” गीता भावमृत” की जिसके रचनाकार हैं हिंदी के *प्रख्यात वरिष्ठ साहित्यकार पंडित आदित्य द्विवेदी।

पंडित आदित्य द्विवेदी ने बताया की गीता में वर्णित सम्पूर्ण 18 अध्याय के सात सौ श्लोकों के भाव को साधारण भाषा में काव्य शैली में गढ़ने में मात्र 18 दिन का समय लगा।
उन्होंने बताया की ,श्रीमद्भागवत गीता जीवन जीने की सही राह दिखाती है. गीता की बातों का अनुसरण करने से व्यक्ति को जीवन के हर क्षेत्र में सफलता मिलती है. इसमें हर समस्या का हल छिपा है.
श्रीमद्भागवत गीता में भगवान कृष्ण के उपदेशों का वर्णन है. गीता के ये उपदेश श्रीकृष्ण ने महाभारत युद्ध के दौरान अर्जुन को दिए थे. गीता में दिए उपदेश आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं और मनुष्य को जीवन जीने की सही राह दिखाते हैं. गीता की बातों को जीवन में अपनाने से व्यक्ति को खूब तरक्की मिलती है. गीता एकमात्र ऐसा ग्रंथ है जो मानव को जीने का ढंग सिखाता है. गीता जीवन में धर्म, कर्म और प्रेम का पाठ पढ़ाती है. गीता में श्रीकृष्ण ने बताया है कि जीवन में समस्याएं किन वजहों से आती हैं और उनका हल क्या है. जल्द ही ज्ञान का भंडार ये पुस्तक जनता के लिए उपलब्ध हो जाएगी।

15 जनवरी 2024 को संक्रांति के पवित्र अवसर पर रामलीला मैदान , ऐशबाग, लखनऊ के तुलसी मानस भवन में इस पुस्तक का लोकार्पण होना है ,जिसके बाद पुस्तक जनता के लिए उपलब्ध होगी।




